सनातन धर्म में दान का विशेष महत्व है। उज्जैन की पावन भूमि पर आपके द्वारा दिए गए दान का संकल्प आचार्य जी द्वारा आपके गोत्र व नाम से किया जाएगा।
गरीबों, साधु-संतों और जरूरतमंदों को भोजन कराना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है। आपके सहयोग से नित्य भोजन व्यवस्था।
गौमाता में 33 कोटि देवताओं का वास है। उनके चारे, औषधी और संरक्षण हेतु अपनी सामर्थ्य अनुसार सहयोग करें।
किसी भी शुभ अवसर, जन्मदिन, या पूर्वजों की स्मृति में विद्वान ब्राह्मणों को भोजन कराना अत्यंत फलदायी है।
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